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गबन: रिटायर सचिव के खाते में लाखों रूपये की मजदूरी डाली, बहू है ग्राम प्रधान,भांजे की फर्म में मैटेरियल सहित अन्य सामग्री का भुगतान

 

विकास खंड महेवा के ग्राम पंचायत हथनौरा का मामला,सीडीओ बोले दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।

उरई जालौन। जनपद जालौन का विकासखण्ड महेवा इस समय लगातार ग्राम निधि और मनरेगा योजना में फर्जीवाड़े एवं फर्जी भुगतान को लेकर सुर्खियों में है। ब्लॉक के जिम्मेदारों में शासनादेश को ताक में रख कर भुगतान किए है। जिसमें ग्राम निधि में प्रधान,उसके पति,पत्नी,पुत्रों,ससुर सहित अन्य परिजनों के खातों में मजदूरी की धनराशि निकालने के साथ साथ गोपालक का मानदेय एवं जॉब कार्ड बनाकर गबन कर रहे है। इस कार्य में ग्राम पंचायत सचिवों की लापरवाही साफ उजागर हो रही है। शिकायत के बाद खबर प्रकाशन होने पर डीएम ने जांच करने के लिए अधीनस्थ अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। कार्यवाही क्या हुई इस बाबत अधिकारी जांच रिपोर्ट डीएम को भेजने की बात कर अपना पल्ला झाड़ रहे है।

ऐसा ही एक भ्रष्टाचार का मामला महेवा ब्लॉक के ग्राम पंचायत हथनौरा का सामने आया है। जहां पर ग्राम पंचायत सचिव सूर्यांश पटेल ने जिम्मेदारों की मिलीभगत से नियमों को दरकिनार करते हुए ग्राम प्रधान मुन्नी देवी के ससुर हरेंद्र सिंह ( रिटायर सचिव ) के खाते में मजदूरी का पैसा निकाला जा रहा है। सीसी,इंटरलॉकिंग,टाइल्स,रंगाई पुताई, लाइट फिटिंग,साफ सफाई की धनराशि अपने भांजे की चौहान टेंडर्स नामक फर्म में की जा रही है। इतना ही नहीं झाड़ी सफाई से लेकर सचिवालय की देख रेख का फर्जी भुगतान ससुर और भांजे की फर्म में कर दिया

ग्रामीणों के मुताबिक सतपाल,लल्लन,सुरेन्द्र और धर्मेंद्र के दरवाजे इंटरलॉकिंग नाली निर्माण के नाम पर चौहान ट्रेडर्स नमक फर्म में 88 हजार का फर्जी भुगतान किया गया। जबकि वहां पर कोई कार्य नहीं हुआ है।

  1. ऐसे कई भुगतान है जो बिना कार्यों के भुगतान कर लिए गए है।

जबकि पंचायतीराज एक्ट के तहत मजदूरी की धनराशि मजदूर के खाते में और रिश्तेदारों की फर्म में भुगतान न करने के सख्त आदेश है। लेकिन लेकिन जिम्मेदारों की मिलीभगत से भ्रष्टाचार पर अंकुश नहीं लग पा रही है। सीडीओ के के सिंह ने जांच करा के दोषियों पर कार्यवाही की बात कही है

विधायक निधि द्वारा डाली गई इंटरलॉकिंग का भुगतान ग्राम पंचायत से होने की चर्चाएं जोरो पर,जिम्मेदारों में मचा हड़कंप।

ग्रामीणों के मुताबिक विधायक निधि से गांव में इंटरलॉकिंग का कार्य कराया गया था। विधायक निधि से डाली गई इंटरलॉकिंग का भुगतान ग्राम पंचायत ने फर्जी तरह से कर लिया है। मामला सुर्खियों में आने के बाद अब हड़कंप मचा हुआ है। जिम्मेदार जांच करवाने की बात कह कर अपना पल्ला झाड़ रहे है।

 

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