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बीडीओ ने गठित की तीन सदस्यीय टीम,तीन सप्ताह बीतने के बाद भी मामला शून्य

ग्राम पंचायत बड़ागांव में रोजगार सेवक ने माता,पिता,पत्नी सहित अन्य परिजनों के जॉब कार्ड बना कर लाखों की धनराशि निकाली थी।

ग्राम विकास अधिकारी ने प्रधान के पुत्र- बधू सहित अन्य परिजनों को दिया शौचालय का लाभ,जिम्मेदार बोले कार्यवाही होगी।

जनपद जालौन के विकास खण्ड कदौरा में रोजगार सेवक महेंद्र सिंह परिहार ने पंचायत सचिव अर्चना प्रजापति और ग्राम प्रधान लाखन सहित ब्लॉक के अधिकारियों की मिलीभगत से मनरेगा एक्ट व पंचायती राज नियमावली का उल्लंघन करते हुए अपने परिवारजनों को लाभ देने के साथ साथ ग्राम निधि से अपनी पत्नी को निजी लाभ पहुंचाने का कार्य किया था। इस मामले की शिकायत 27 नवंबर 2025 को जिम्मेदार अधिकारियों से की थी,लेकिन तीन माह बीत जाने के बाद भी कार्यवाही तो दूर,अधिकारियों ने जांच करना उचित नहीं समझा। जिस पर शिकायतकर्ता ने आयुक्त ग्राम्य विकास विभाग लखनऊ और पंचायत राज मंत्री को शिकायती पत्र भेजकर कार्यवाही की मांग की हैं। जिस पर बीडीओ संदीप मिश्रा ने विगत 13 मार्च को तीन सदस्यीय टीम गठित कर जांच के आदेश दिए थे। लेकिन तीन सप्ताह का समय बीतने के बाद भी कार्यवाही शून्य है। वहीं ग्रामीणों ने सचिव पर ग्राम प्रधान के पुत्र मोहित कुमार उसकी पत्नी काजल देवी और रोजगार सेवक की पत्नी सपना सहित अन्य परिजनों को व्यक्तिगत शौचालय का लाभ देने का आरोप लगाया है,मामला सुर्खियों में आने के बाद हड़कंप मच गया है।

गौरतलब है कि विकास खंड कदौरा के ग्राम पंचायत बड़ागांव में रोजगार सेवक महेंद्र सिंह परिहार है। इन्होंने अपनी पत्नी सपना का जॉब कार्ड संख्या 817 पिता जगमोहन सिंह पुत्र रघुराज सिंह जॉब कार्ड संख्या 473 माता कौशल्या सिंह पत्नी जगमोहन जॉब कार्ड संख्या 825 को बना कर लगातार कई वर्षों से फर्जी भुगतान किया जा रहा था। इतना ही नहीं रोजगार सेवक ने ग्राम प्रधान लाखन और सचिव अर्चना प्रजापति की सांठ गांठ से ग्राम निधि से अपनी पत्नी के खाते में फर्जी मजदूरी भुगतान दिनांक 24/10/2024 को क्रमशः 56045 रुपए और 120474 रुपए को कर दिया।

शिकायतकर्ता द्वारा संपूर्ण मामले की शिकायत अधिकारियों से की और समस्त अभिलेख उपलब्ध करवाए,सुनवाई न होने पर 27 नवंबर 2025 को मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल के माध्यम से शिकायत संख्या 40016525019003 दर्ज कराई गई थी। जिस पर बीडीओ ने 11 दिसंबर को तीन सदस्यीय समिति गठित करते हुए जांच के आदेश दिए थे। जांच समिति में अजय कुमार सिंह अवर अभियंता ( ग्रा०अ ०वि०),लोकेंद्र सिंह अति० कार्यक्रम अधिकारी (मनरेगा),मलखान सिंह ए डी ओ पंचायत (स०क०) शामिल थे। गठित टीम को दो दिवस के अंदर संयुक्त जांच आख्या प्रस्तुत करने के लिए आदेशित किया गया था। लेकिन तीन माह बीत जाने के बाद भी अधिकारियों ने सुनवाई नहीं हुई,बल्कि मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया। शिकायतकर्ता ने इसकी शिकायत आयुक्त ग्राम्य विकास लखनऊ से की थी। जिस पर बीडीओ ने सहायक विकास अधिकारी देवेंद्र कुमार सिंह, अवर अभियंता आर ई डी गिरजेश चंद्र और अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी सुशील कुमार को जांच के आदेश दिए थे। वहीं जिम्मेदारों का कहना है कि मामला संज्ञान में आया है जांच कराई जाएगी। कठोर कार्यवाही होगी।

 

ग्राम विकास अधिकारी अर्चना प्रजापति ने ग्राम प्रधान लाखन श्रीवास के छोटे पुत्र मोहित कुमार,उसकी पत्नी काजल देवी, रोजगार सेवक की पत्नी सपना सहित अन्य परिजनों को व्यक्तिगत शौचालय का लाभ दिया है। 

ग्रामीणों ने बताया कि आधा सैकड़ा से अधिक शौचालय उन लोगों को दिए गए है जो गांव के नहीं है। फर्जी तरह से शौचालय की धनराशि का बंदरबाट किया गया है।

सात वर्षों से कदौरा ब्लॉक में तैनात है ग्राम विकास अधिकारी अर्चना प्रजापति।

ग्राम विकास अधिकारी अर्चना प्रजापति कि सात वर्ष पहले कदौरा ब्लॉक में ज्वाइनिंग हुई थी। ज्वाइनिंग के बाद से अभी तक उनकी तैनाती कदौरा ब्लॉक में हैं। जबकि शासनादेश के अनुसार तीन से 5 वर्ष तक एक ब्लॉक में रहने का प्रावधान है। डेढ़ वर्ष पूर्व उक्त सचिव गोशाला संचालन में लापरवाही के चलते डीएम के आदेश पर एसडीएम ने निलंबित किया था।

उसके बाद भी अधिकारियों ने उन्हीं ग्राम पंचायतों का कार्यभार दे दिया है।

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