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वेदव्यास जन्मभूमि संरक्षण कार्य में अनियमितता का आरोप

 

ग्राम प्रधान समेत समिति पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री से निष्पक्ष जांच की मांग की

कालपी (जालौन)। तहसील कालपी के ग्राम पंचायत कीरतपुर अंतर्गत मजरा शेखपुर बुल्दा स्थित विश्वविख्यात धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थल महर्षि वेदव्यास जन्मभूमि पर यमुना नदी के कटान को रोकने के लिए पर्यटन विभाग द्वारा कराए जा रहे बोल्डर पिचिंग एवं सुरक्षात्मक कार्य की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाए गए हैं। ग्राम प्रधान पवनदीप निषाद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर निर्माण कार्य की निष्पक्ष एवं तकनीकी जांच कराए जाने की मांग की है।

मुख्यमंत्री को भेजे गए शिकायती पत्र में ग्राम प्रधान ने कहा है कि महर्षि वेदव्यास जन्मभूमि प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे देश की आस्था, धर्म और संस्कृति का महत्वपूर्ण केंद्र है। यमुना नदी के कटान से इस ऐतिहासिक स्थल को संभावित खतरे को देखते हुए पर्यटन विभाग द्वारा कटानरोधी कार्य कराया जा रहा है, लेकिन वर्तमान में चल रहे निर्माण कार्य में निर्धारित तकनीकी मानकों एवं गुणवत्ता संबंधी नियमों के पालन को लेकर क्षेत्रीय लोगों में संदेह व्याप्त है।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि निर्माण कार्य में प्रयुक्त की जा रही सामग्री की गुणवत्ता संदिग्ध प्रतीत हो रही है। बोल्डरों के चयन, उनकी मजबूती, आकार, मात्रा तथा पिचिंग कार्य की तकनीकी प्रक्रिया को लेकर भी स्थानीय स्तर पर सवाल उठाए जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं कराया गया तो भविष्य में यमुना नदी में जलस्तर बढ़ने अथवा बाढ़ आने की स्थिति में कटानरोधी व्यवस्था कमजोर साबित हो सकती है, जिससे महर्षि वेदव्यास जन्मभूमि एवं आसपास के क्षेत्र को नुकसान पहुंचने की आशंका है।

ग्राम प्रधान पवनदीप निषाद ने कहा कि महर्षि वेदव्यास जन्मभूमि केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और इतिहास की अमूल्य धरोहर है। ऐसे महत्वपूर्ण स्थल की सुरक्षा के लिए कराए जा रहे कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि जनता के धन से कराए जा रहे विकास कार्यों में पारदर्शिता एवं गुणवत्ता सुनिश्चित होना आवश्यक है।

शिकायत में यह भी कहा गया है कि यदि निर्माण कार्य में मानकों की अनदेखी की जा रही है तो इससे सरकारी धन के दुरुपयोग की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। इसलिए किसी स्वतंत्र एवं सक्षम तकनीकी टीम द्वारा मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य का स्थलीय निरीक्षण कराया जाए तथा प्रयुक्त सामग्री एवं निर्माण प्रक्रिया की गहन जांच की जाए।

इस संबंध में महर्षि वेदव्यास विकास समिति के अध्यक्ष उमाशंकर निषाद ने कहा कि महर्षि वेदव्यास जन्मभूमि देश की अमूल्य धार्मिक, ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहर है। इसकी सुरक्षा के लिए कराए जा रहे कटानरोधी कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती। यदि क्षेत्रीय लोगों द्वारा गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं तो शासन को मामले की गंभीरता को समझते हुए निष्पक्ष तकनीकी जांच करानी चाहिए।

वहीं समिति के महामंत्री रामजी रामसखा एडवोकेट ने कहा कि यमुना नदी का कटान वर्षों से इस ऐतिहासिक स्थल के लिए चिंता का विषय रहा है। सरकार द्वारा कराया जा रहा सुरक्षात्मक कार्य भविष्य की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, लेकिन यदि कार्य में मानकों की अनदेखी की जाती है तो इसका उद्देश्य प्रभावित हो सकता है। उन्होंने कहा कि जनता के धन से कराए जा रहे विकास कार्यों में पूर्ण पारदर्शिता और जवाबदेही आवश्यक है तथा जांच में अनियमितता पाए जाने पर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।

ग्राम प्रधान पवनदीप निषाद, समिति अध्यक्ष उमाशंकर निषाद, महामंत्री रामजी रामसखा एडवोकेट तथा ग्राम प्रधान देवकली बालसिंह निषाद ने संयुक्त रूप से मुख्यमंत्री से मामले की उच्चस्तरीय जांच कराकर निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका कहना है कि महर्षि वेदव्यास जन्मभूमि केवल शेखपुर बुल्दा या जालौन की ही नहीं, बल्कि पूरे देश की आस्था और सांस्कृतिक विरासत का केंद्र है, इसलिए इसके संरक्षण से जुड़े प्रत्येक कार्य की गुणवत्ता सर्वोच्च स्तर की होनी चाहिए।

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