भ्रष्टाचार कराने में अधिकारियों की मिलीभगत, महेवा में करोड़ों की फर्म मालिक के परिजन कुशल श्रमिक, फर्जी तरह से लाखों रूपये रूपये की मजदूरी हड़पी,
अधिकारी बोले जांच करा कर करेंगे कार्यवाही।
उरई जालौन। जनपद के विकास खंड महेवा में ग्राम पंचायत स्तर पर भ्रष्टाचार रुकने का नाम ही नहीं ले रहा है, बल्कि प्रतिदिन भ्रष्टाचार के नए कारनामे दिखाई देते हैं।

जानकारी के अनुसार शिशुपाल सिंह चौहान पुत्र चंद्रशेखर निवासी ग्राम महेवा जो कि चौहान कॉन्ट्रैक्टर एंड सप्लायर्स संचालक हैं। इनकी पत्नी रश्मि देवी कुशल श्रमिक (कारीगर) में दर्ज हैं, और विकास खंड के गुढ़खास,मैनुपुर समेत कई ग्राम पंचायतों में भवन निर्माण इत्यादि में सैकड़ों दिन कार्य भी किया है। जबकि रश्मि देवी कानपुर निवास करती हैं। फर्म संचालक की माता जी मालती देवी भी कुशल श्रमिक हैं। यह भी मजदूरी करती हैं। फर्म संचालक के भाई अखिलेश सिंह और भाभी कल्पना देवी भी कुशल श्रमिक में दर्ज हैं। जो पिछले कई वर्षों से गुढ़खास और मैनुपुर समेत अन्य ग्राम पंचायतों में भवन,इंटरलॉकिंग आदि में कारीगर का कार्य कर रहे हैं। लेकिन यह अलग बात है कि इन करोड़पतियों को किसी भी ग्रामीण ने कार्य करते हुए कभी देखा नहीं है।
फर्म संचालक के परिजनों के नाम भुगतान
अखिलेश सिंह ने वित्तीय वर्ष 2023-24 में 65 दिन 2024-25 में 29 दिन और वित्तीय वर्ष 2025-26 में 84 दिन कुशल श्रमिक का फर्जी भुगतान लिया है।
भाभी कल्पना देवी ने वित्तीय वर्ष 2023-24 में 65 दिन,वित्तीय वर्ष 2024-25 में 32 दिन और वित्तीय वर्ष 2025-26 में 70 दिन कुशल श्रमिक का भुगतान लिया है।
फर्म संचालक ने ब्लाक महेवा राजनीतिक पहुंच के कारण मजबूत सिंडिकेट बनाकर अपने परिवार वालों को निजी लाभ दिलवाया है। जबकि ग्रामीणों का कहना है कि फा
र्म संचालक के पास कानपुर,उरई में प्रॉपर्टी होने के साथ साथ अच्छी खासी कृषि योग्य जमीन भी उपलब्ध है। फिर भी यह लोग जानबूझकर मजदूरों का हक मार रहे हैं।
उक्त फर्म संचालक ने दर्जनों ग्राम पंचायतों में बिना कार्य के फर्म में भुगतान करवा लिया है। डीएम द्वारा गठित टीम जांच कर रही है
सचिव और प्राइवेट कंप्यूटर ऑफरेटर करते है फर्जीवाड़ा।
क्षेत्रीय लोगों की माने तो कुशल व अकुशल श्रमिकों की फीडिंग कर फर्जी भुगतान करने के लिए प्राइवेट कंप्यूटर ऑफरेटर सुमित सिंह को महारत हासिल है।
दो दर्जन से अधिक ग्राम पंचायतों में प्राइवेट कंप्यूटर ऑफरेटर ने प्रधानों,रोजगार सेवकों के परिजनों को रजिस्ट्रेशन करा कर लाखों का भुगतान किया है। सचिव जितेन्द्र कुशवाहा की ग्राम पंचायतों में फर्जीवाड़ा चरम पर है।
पूर्व में डीसी मनरेगा रामेंद्र सिंह कुशवाह ने शिकायत पर जांच की थी,जिसकी आख्या उन्होंने डीएम को सौंपी थी,अभी तक क्या हुआ,अधिकारी बताने को तैयार नहीं है।