इमाम हुसैन की शहादत सब्र,शुक्र,हक़ और अमन का पैग़ाम है : मौलाना मुहम्मद इकरार अहमद कादरी बरकाती समदी।
कदौरा। माह मोहर्रम का महीना शुरू होंने के बाद जगह जगह हज़रतें इमामे हुसैन के चाहने वाले शरबत,लंगर की तकसीम करने के साथ मजलिस का दौर शुरू हो गया है। मौलाना मुहम्मद इक़रार अहमद समदी ने कहा कि इस्लामी साल का आगाज़ माह-ए-मुहर्रम से होता है। यह महीना क़ुर्बानी,सब्र,ईसार,हक़ और सच्चाई पर डटे रहने का पैग़ाम देता है। उन्होंने कहा कि इस्लामी साल की शुरुआत भी क़ुर्बानी की याद से होती है और उसका समापन भी क़ुर्बानी के जज़्बे पर होता है जो इंसानियत को दीन और सच्चाई के लिए हर तरह की क़ुर्बानी देने की प्रेरणा देता है। मुहर्रम की दसवीं तारीख़,यानी यौम-ए-आशूरा, इस्लामी तारीख़ का अत्यंत महत्वपूर्ण और बरकतों वाला दिन है। इसी दिन प्यारे नबी हज़रत मुहम्मद मुस्तफा के नवासे हज़रत इमाम हुसैन रज़ियल्लाहु अन्हु ने मैदान-ए-कर्बला में भूख,प्यास और कठिन परिस्थितियों को बर्दाश्त करते हुए हक़ और सच्चाई का परचम बुलंद रखा तथा अल्लाह की राह में अपनी जान क़ुर्बान करके क़ियामत तक आने वाली इंसानियत के लिए एक महान मिसाल क़ायम कर दी। यौम-ए-आशूरा इबादत,तौबा,इस्तिग़फ़ार,ज़िक्र-ओ-अज़कार और तिलावत-ए-कुरआन का विशेष दिन है। हदीसों में इस दिन की अनेक फ़ज़ीलतें बयान की गई हैं। इसलिए मुसलमानों को चाहिए कि वे इस दिन अधिक से अधिक इबादत करें, अल्लाह से अपनी मग़फ़िरत की दुआ करें और नेक आमाल को अपनाएँ।
हज़रत इमाम हुसैन की क़ुर्बानी किसी एक क़ौम या मज़हब तक सीमित नहीं है,बल्कि पूरी इंसानियत के लिए मशाल-ए-राह है। उनकी शहादत ने यह साबित कर दिया कि हक़,इंसाफ़ और मानवीय मूल्यों की रक्षा के लिए क़ुर्बानी सबसे बड़ी ताक़त है।

मौलाना इक़रार कादरी बरकाती ने कहा कि इमाम हुसैन रज़ियल्लाहु अन्हु ने अपना सर तो कटा दिया, लेकिन ज़ुल्म और बातिल के सामने कभी सिर नहीं झुकाया। उनकी शहादत हमें यह सबक़ देती है कि हर हाल में हक़ और सच्चाई का साथ दिया जाए तथा बातिल और अन्याय से किसी प्रकार का समझौता न किया जाए।
उन्होंने मुस्लिम समाज से अपील की कि मुहर्रम के महीने में ग़रीबों और ज़रूरतमंदों की सहायता करें,लंगर और सबील का एहतिमाम करें,नमाज़ों की पाबंदी करें,क़ुरआन शरीफ़ की तिलावत को अपना मामूल बनाएँ और समाज में अमन,भाईचारा,मोहब्बत,एकता और इंसानियत को बढ़ावा दें।
अंत में उन्होंने कहा कि हज़रत इमाम हुसैन की शहादत हमें सब्र,शुक्र, अख़ुव्वत,इंसाफ़,इंसानियत,सच्चाई और नेकियों के रास्ते पर चलने का पैग़ाम देती है। समाज में शांति, सद्भाव और प्रेम बनाए रखना तथा बुराइयों से बचकर नेक रास्ते पर चलना ही कर्बला का वास्तविक संदेश है।
फोटो परिचय। मौलाना मोहम्मद इकरार अहमद