कालपी मंडी में तौल व शुल्क के नाम पर गड़बड़ी के आरोप, जांच की उठी मांग
कर्मचारी के आरोप—बिना गेटपास निकासी, अवैध वसूली से सरकार को राजस्व नुकसान
कालपी (जालौन)।
कृषि उत्पादन मण्डी समिति कालपी एक बार फिर विवादों में घिर गई है। मण्डी में तौल व्यवस्था और मण्डी शुल्क के नाम पर किसानों के साथ अनियमितता तथा राजस्व चोरी के गंभीर आरोप सामने आए हैं। एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि मण्डी में सचिव के इशारे पर बड़े पैमाने पर बिना गेटपास के दलहन और तिलहन की निकासी कराई जा रही है, जिससे सरकार को भारी राजस्व क्षति हो रही है।

सूत्रों के अनुसार, प्रतिदिन आधा दर्जन से अधिक ट्रक बिना निर्धारित शुल्क चुकाए मण्डी से बाहर निकल जाते हैं। मण्डी में लगाए गए सीसीटीवी कैमरों की जांच से इस पूरे मामले का खुलासा हो सकता है। आरोप है कि शाम से देर रात तक कुछ कर्मचारी और सुरक्षा कर्मी प्रति बोरी 20 से 30 रुपये तक की अवैध वसूली करते हैं, जबकि नियमानुसार तिलहन व दलहन पर निर्धारित जीएसटी और मण्डी शुल्क अलग से लिया जाना चाहिए।
मण्डी परिसर में अवैध गतिविधियों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से बिना ठेका मण्डी में कैन्टिन संचालित हो रही है, जबकि पान, जलपान और तथाकथित ‘खोची’ की दुकानें भी अवैध रूप से चल रही हैं। आरोप है कि इन दुकानों के माध्यम से किसानों की उपज की चोरी कर उसे बेचा जाता है, जो नियमों के विरुद्ध है।
इसके अलावा, किसानों के लिए मूलभूत सुविधाओं की कमी भी सामने आई है। मण्डी में पीने के पानी और बैठने की समुचित व्यवस्था न होने से किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
इस पूरे मामले में मण्डी सचिव ने सभी आरोपों को निराधार बताया है। हालांकि स्थानीय लोगों और सूत्रों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है। उन्होंने आयुक्त झांसी, डिप्टी डायरेक्टर मण्डी तथा जिलाधिकारी जालौन से मांग की है कि मण्डी की सीसीटीवी फुटेज और आवक-निकासी के रिकॉर्ड की गहन जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।